Chapter 6 / 25, 4 मिनट
जानी हुई तकलीफ़, अनजानी शांति
तुम्हारा मन और शरीर सुरक्षा को आराम से नहीं समझते। वो सुरक्षा को 'पहचान' से समझते हैं — भले ही वो पहचान दर्द की हो।
तुम साफ़ जानते हो कि यह चक्र तुम्हें चोट पहुँचाता है। फिर भी, बार-बार, तुम उसी तरह के लोगों, उसी तरह के हालात, उसी तरह की भावनात्मक हलचल की तरफ़ खिंच जाते हो।
यह तुम्हारी कमज़ोरी नहीं है। यह एक बहुत पुरानी ट्रेनिंग है। तुम्हारा तंत्रिका तंत्र एक सीधा सा नियम मानता है —
आराम नहीं। शांति नहीं। बस — पहचाना हुआ।
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